एक अपराधी कितने इतेफाक
एक गाना चल रहा था, गाना विकास दुबे प्रकरण में एकदम फिट बैठता है "ज़िन्दगी एक इत्तेफाक है कल भी इत्तेफाक थी आज़ भी इत्तेफाक है" विकास ने करीब 30 सालों तक अपने अपराध के सामाज्य को खड़ा किया और वो हर सरकारों में फलता फूलता रहा ये भी एक इत्तेफाक था ? जिले के टाप टैन अपराधियों में नाम नहीं था इत्तेफाक था ? सी ओ का लैटर पुलिस आफिस से गायब होना एक इत्तेफाक था ? पुलिस रेड से पहले सूचना मिली इत्तेफाक था ?
सूचना मिलने पर भागा नहीं आठ पुलिस कर्मियों को मार कर भागा
अक्सर अपराधी पुलिस आने की सूचना पाकर भाग जाते हैं लेकिन आठ पुलिस कर्मी शहीद कर दिए गये इत्तेफाक था ? घटना के बाद दो दिनों तक केवल 6 कि मी दूर छिपा रहा इत्तेफाक था ? फिर दिल्ली होते हुए फरीदाबाद पहुंचता है, दो दिन रुकता है पुलिस पहुंचने से 30 मिनट पहले भाग जाता है ये भी इत्तेफाक था ?
विना हथियारों वाले प्राईवेट सुरक्षा गार्ड उसे पकड़ लेते हैं
उज्जैन पहुंचकर वीआईपी पर्ची कटवाकर महाकाल के दर्शन करता है, फिर खुद पहचान बताता है कि मैं कानपुर वाला विकास दुबे हूं इत्तेफाक था ? विना हथियारों वाले प्राईवेट सुरक्षा गार्ड उसे पकड़ लेते हैं वो कोई विरोध नहीं करता ना उसके पास कोई हथियार था ये भी इत्तेफाक था ? फिर कुछ पुलिस वाले उसे भेड बकरी की तरह ले जाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करके यूपी पुलिस को सोप देती है .ये भी इत्तेफाक था ?
शुक्रवार सुबह कानपुर पहुंचने से पहले गाड़ी पलटी, विकास दुबे एक पुलिस वाले का वैपन छीनकर भागता है पुलिस पकड़ने की कोशिश करती है तो मुठभेड़ में मार गिराया जाता है ये भी इत्तेफाक था ? लेकिन हर इत्तेफाक कुछ सवाल जरूर छोड़ गया जिनके जवाब अब कभी नहीं मिलेंगे हर मौत अपने साथ कुछ रहस्य लेकर सदा सदा के लिए खामोशी की दुनिया में गुम हो जाती है।
पेड़ तो काट दिया, पर इसे बड़ा करने वाले माली कौन कौन है ?
ये भी इत्तेफाक ही है । जिसने ना जाने कितनों की लाज बचाली वरना इस बरगद के पेड़ पर कितनों के आशियाने थे कितनों की पनाहगार था, और कैसे ये पेड़ इतना बड़ा बना अब कभी प्रामाणिक रूप से पता नहीं चलेगा । फिर अब कोई विकास दुबे नहीं होगा ? ये भी गारन्टी नहीं है।
विकास दुबे तो मारा गया, वो इनकाउंटर में ना मरता, तो कानून उसे फांसी की सजा अवश्य देता। यदि वो कानून की फांसी से मरता तो मरने से पहले न जाने कितनो की राजनैतिक मौत का कारण बन जाता।
इनकाउंटर से उपजे कुछ सवाल जरूर है ?
- विकास को उज्जैन से चार गाडियां भारी सुरक्षा व्यवस्था में लेकर चलती है
- ऐसे दुर्दांत अपराधी को हथकड़ी जरूर लागाई गई होगी ?
- चार गाडियां लेकर निकलती है बाद में तीन गाड़ियां क्यो रह जाती है ?
- बीच में जिसमे विकास को लेकर चले वो गाडी क्यो बदली जाती है ?
- माना कि सुरक्षा कारणों से ऐसा किया हो।
- लेकिन घटना स्थल से पहले 12 कि मी पहले मीडिया सहित सभी ट्रैफिक क्यो रोका गया?
- क्या कोई वीआईपी मूवमेंट उस वक्त रोड पर हो रहा था?
- जो गाडी पलटी ना उसका टायर फटा ना रोड पर अचानक ब्रेक लगाने से रोड पर निशान बने और गाडी पलट गई?
- गाडी के सभी शीशे ठीक-ठाक है खिड़की सुरक्षित है तो विकास किस रास्ते बहार निकलना ?
- गाड़ी पलटने पर न विकास को कोई चोट आयी न कोई ऊपर गिरा?
- गाड़ी पलटने पर उसे बाहर निकलने में भी कोई रुकावट नहीं आयी?
- गाडी पलटने के वाद सबको चोटे जरूर आईं होगी। सभी इधर उधर लुढ़के।
- विकास सीधा बैठा रहा और उसने पुलिस वाले की पिस्टल छीन ली और भाग गया?
- दो गाड़ियां ये सब तमाशबीन बनी सब-कुछ तब तक देखती रही जबतक विकास जंगल तक नहीं भागा?
- विकास जब गोलियां चलाता हुआ भाग रहा था तो उसकी पीठ सामने होनी चाहिए थी।
- लेकिन उसके सीने पर तीन गोलियां और एकगोली हाथ पर लगी । ये सब बारिश में हुआ।
- गोली लगने के बाद विकास गिरा जरुर होगा ?
- विकास गोली लगने से नीचे गिरा तो उसके कपड़े साफ सुथरे कैसे रहें?
या फिर गोली लगने पर वो चुपचाप आकर पुलिस की गाड़ी में आकर बैठ गया और बोला होगा कि मैं घायल हो गया हूं मुझे उपचार के लिए अस्पताल ले चलो । और अगर गाड़ी पलटी कई को चोट लगी होगी लेकिन गाड़ी में खून का कोई कतरा तक नहीं लगा था? मीडिया जिस गाड़ी में विकास को दिखाती है कुछ कि मी के बाद गाडी जो पलटी वो दूसरी थी । सवाल बहुत है जवाब भी कुछ नहीं मिलेगा।
उसके पैर रॉड थी और भागना चाहता था।
इसी इत्तेफाक पर सपा के अखिलेश यादव ने ट्वीट लिखा था "यदि गाड़ी नहीं पलटती तो सरकार पलट गयी होती ? यूंकि ये भी इत्तेफाक ही था।
ये लेख भी एक इत्तेफाक ही समझा जाए आपका नरोत्तम शर्मा