उत्तर प्रदेश की ध्वस्त कानून व्यवस्था
हाथरस की घटना से मन बहुत व्यथित व दुखी हैं ।और मैं या आपके दुःख व्यक्त करने से कुछ होने वाला भी नहीं ।या तो हमें किसी राजनैतिक पार्टी का एजेंट कह दिया जाएगा या अर्बन नक्सल । लेकिन क्या इस भय से चुप हो जाए?
क्योकि हाथरस की बेटी के साथ शुरू से ही कैसी बर्बरता हुई,कैसी ना इन्साफी हुई । सब कुछ तो सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में आ चुका है। लेकिन प्रश्न ये हैं कि क्या ये सब किसी अधिकारी, नेता या आम नागरिक ने नहीं देखा ? यदि हां तो अधिकांश की चुप्पी क्या दर्शाती है? कि विश्व गुरु बनने के बाद यही होगा । दिन रात हिन्दु हितों की बात करने वाली पार्टी के शासनकाल में हिन्दू रीति-रिवाज व परम्पराओं को ध्वस्त कर दिया जाएगा ।
हाथरस प्रकरण को लेकर अनेक प्रश्न है जो मेरे साथ साथ आपके मन में भी होंगे उनके उत्तर तो खोजने होंगे , जानने होंगे और क्या इनके उत्तर मिलेंगे?
सबसे बडा सवाल ये भी है कि क्यो शुरू से ही इस बेटी के मामले में पुलिस ने हीला हवाली की ?
क्यो इतनी गम्भीर चोटो के बाद उसके उचित इलाज की व्यवस्था नहीं की ?
क्यो प्रशासन कहता रहा कि ये फेक न्यूज है ?
क्यों लड़की के सोशल मीडिया पर दुष्कर्म की बात कहने के बाद भी पुलिस प्रशासन यही कह रहा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ ?
क्यों रात में बिना परिजनों के क्यो पीड़िता का अन्तिम संस्कार प्रशासन ने कर दिया ?
क्या सरकार का दबाव था या स्थानीय प्रशासन ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ये सब किया गया ?
क्यों मृतक के साथ ऐसा व्यवहार किया गया जोकि दुर्दांत अपराधी या आतंकी के साथ भी नहीं किया जाता ? जबकि वो तो खुद पीड़िता थी ।
क्यो मरने के बाद भी उसे उस आंगन में नहीं ले जाया गया ? जहां वो पैदा हुईं ,पली बढ़ी जीवन के 19 बसंत पार किए।
अब सरकार ने एस आई टी का गठन किया है, कैसे माना जाए कि एस आई टी गठन के बाद सब-कुछ ठीक हो जाएगा। नहीं माई बाप कुछ ठीक नहीं होगा इसी वज़ह से पीडिता के पिता ने अब एस आई टी की जगह सीबीआई से जांच की मांग की है ।
एक पिता की मांग भी जायज है क्योकि उ प्र प्रशासन से उसे न्याय ना मिलने की वज़ह भी साफ हैं । क्योंकि हाथरस प्रशासन के साथ साथ उ प्र प्रशासन में अधिकारी कैसे सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं । कैसे उलटे सीधे ब्यान दे रहे हैं, कैसे आज भी परिवार को डराया धमकाया जा रहा है। बंधक तक बनाकर रखा जा रहा है पूरे गांव को छावनी में बदल दिया गया है।गांव के बाहर बैरिकेडिंग कर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया ।
मीडिया या किसी भी बहारी व्यक्ति के गांव में जाने पर एक दम रोक लगा दी गई है। ताकि शुरू से लेकर आज तक जो भी प्रशासन ने छिपाया हैं उसकी विस्तार से सच्चाई देश के सामने ना आ पाए कैसा लोकतंत्र है ये ? क्या इसी विश्वगुरु बनने की परिकल्पना हमने की थी ?
क्या इसी हिन्दुत्व की परिकल्पना हम करेंगे जिसमें हमारे रीता रिवाज ,व परम्पराओं को प्रशासन का गुलाम बना कर रख दिया जाए । मैं दलित या स्वर्ण की बहस में नहीं जाना चाहता ये राजनीतिक लोगों का काम है लेकिन देश की एक बेटी के साथ हम सबकी बेटी के साथ जो कुछ भी हुआ, उसके परिवार के साथ जो भी हुआ? उसके लिए हम खुद को क्याकभी माफ पाएंगे?
यदि आवाज नहीं उठाएंगे , ये अकेले में सोचना ज़रूर । बेटी के हर गुनाहगार को सजा मिलनी चाहिए चाहे वो प्रशासनिक अधिकारी हो , कर्मचारी हो ,या गुनाह करने वाले दरिंदे हो ।इसी मांग को हर नागरिक को उठाना चाहिए , ओर उठाना होगा चूंकि उस बेटी को जो आज इस दुनियां में नहीं है,व उसके परिवार को उचित न्याय तभी मिल सकेगा जब हम सब उस पीड़ित परिवार के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़े रहेंगे ।
लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार है -